Shares का महत्व
Facebook पर किसी post का share होना सबसे मज़बूत संकेत है कि लोग उसे दूसरों को दिखाना चाहते हैं। भारत में ख़बरें, धार्मिक कंटेंट, मज़ेदार वीडियो और काम की जानकारी सबसे ज़्यादा share होती है। Post के नीचे 'X shares' देखकर लोग समझते हैं कि यह चर्चा में है।
खरीदे गए shares
खरीदे गए shares ऐसे accounts से आते हैं जिनके friends या followers कम होते हैं। इसलिए share संख्या बढ़ती है, लेकिन post असली लोगों की timeline तक ज़्यादा नहीं पहुँचती।
किस post पर
ऐसी posts पर जिन्हें लोग सच में share कर सकते हैं: काम की जानकारी, किसी event की घोषणा, offer, या प्रेरक कहानी। एक साधारण product फ़ोटो पर 500 shares अजीब लगते हैं।
उदाहरण
कोल्हापुर का एक NGO रक्तदान शिविर की post डालता है, जिसमें तारीख़, जगह और संपर्क नंबर है। उसने 200 shares लिए, और साथ में अपने volunteers से post को local groups में share करने को कहा। Shares देखकर असली लोगों ने भी post आगे भेजी।
कितने shares
असली posts पर shares reactions से कम होते हैं, आम तौर पर reactions के 5 से 20 प्रतिशत। Viral या काम की posts पर ज़्यादा।
Post link
Post के time stamp पर क्लिक करें या तीन बिंदु से 'Copy link'। Post public होनी चाहिए।
Delivery
Shares कुछ मिनट से कुछ घंटे में शुरू होते हैं और कुछ घंटों में पूरे होते हैं।
असली shares
Post में लिखें 'अपने परिवार और दोस्तों तक पहुँचाएं'। काम की जानकारी साफ़ और छोटी रखें। ज़रूरी post को अपने page पर pin करें और related groups में share करें।
Facebook के नियम
Meta नकली engagement की अनुमति नहीं देता। संख्या अपनी post के हिसाब से रखें।
Groups में share
Facebook groups में post share करना असली पहुँच का सबसे अच्छा तरीक़ा है। Group के नियम पढ़ें और सिर्फ़ उन्हीं groups में share करें जहाँ विषय मेल खाता है।
Reactions और comments
Shares के साथ post पर reactions और comments भी हों, तो post स्वाभाविक लगती है। सिर्फ़ shares और कोई comment नहीं, यह अजीब लगता है।
क्या नहीं करेंगे
खरीदे गए shares असली पहुँच, followers या बिक्री नहीं लाते। वे share संख्या बढ़ाते हैं।
पेमेंट और रिफ़ंड
UPI से wallet में पैसे डालें। जो shares deliver नहीं हुए, उनका पैसा wallet में लौटता है। पासवर्ड कभी नहीं माँगा जाता।